Friday, 3 May 2019

चिकन पॉक्स/चेचक रोग के लक्षण,चिकित्सा और बचने के उपाय

चेचक/चिकन पॉक्स/छोटी माता या शीतला सभी एक ही रोग है, जो छुआछुत का  रोग है। रोगी को छूने से या उसके कपडे आदि पहनने से चिकन पॉक्स/चेचक एक से दुसरे को हो जातिही । चिकन पॉक्स/चेचक की फुंसियों के खुरंड हवा द्वारा इधर-उधर उड़कर रोग फैलाते हैं । इसलिए इस रोग से बचने का प्रबंध होना चाहिए। लेकिन सभी प्रान्त के रहने वाले हिन्दू चेचक को रोग न मानकर शीतला नामक माता का प्रकोप मानते हैं  इलसिए चेचक की दवा न करके झाड़-फूंक ही अधिकतर करते हैं । लेकिन चेचक छूत से लगने वाला रोग हैं ।


छोटी माता जिसे चेचक भी कहा जाता हैं वह जीवन में प्राय: एक ही बार निकलती हैं । बूढ़े और जवानों को यह कम होती है । बालकों को चिकन पॉक्स/चेचक अधिक होती हैं । ठन्डे देश के निवासी गोरों तथा आदिवासियों को चेचक सबसे ज्यादा तकलीफ देती हैं । चेचक होने पर गोरे तथा आदिवासी बहुत कम बचते हैं । यह रोग अधिकतर बसंत ऋतु आने पर फरवरी-मार्च में फैलता हैं । 

चेचक/चिकन पॉक्स और छोटी माता  रोग के लक्षण


  1. रोगी को कम्प लग कर बड़े जोर का बुखार होता हैं । बुखार के साथ, उलटी, उबकाई, सिरदर्द, बेचैनी आदि लक्षण वर्तमान रहते हैं ।
  2. तीसरे या चौथे दिन शरीर पर लाल-लाल निशान दिखलाई देते हैं । ये निशान सबसे पहले माथा, गर्दन, छाती आदि में दीखते हैं । बाद में समूचे शरीर में फ़ैल जाते हैं ।
  3. भयानक चेचक होने से नाक, आँख, जीभ आदि जगहों में भी फुंसियाँ निकल छालों को तरह हो जाती हैं ।
  4. निकलने वाली फुंसियाँ 48 घंटो के भीतर पहले द्रव पदार्थ से भर कर उभरे हुए छालों की तरह आती हैं । फिर 48 घंटो के भीतर पीव पैदा करती हैं
  5. जब रोग में आराम होने लगता है तब प्राय: 11 वें दिन फुंसियाँ सुख कर खुरण्ड पैदा होने लगते हैं और रोग के सब लक्षण कम हो जाते हैं तथा रोगी 3-4 दिन के भीतर बिलकुल स्वस्थ हो जाता हैं ।
  6. जब यह रोग बढाव पर होता हैं तो बुखार बढ़ जाता हैं। रोगी प्रलाप करने लगता हैं, शरीर कांपने लगता है और रोगी अंत में प्राण त्याग देता है ।
  7. छोटी माता /चेचक के कारण अक्सर निमोनिया, आँख फूली, अंधापन आदि उपद्रव पैदा हो जाता हैं ।
  8. चिकन पॉक्स/चेचक में आराम होने पर मनुष्य को कुरूप बना देती हैं।
  9. चेचक के  दाग जिन्दगी भर बने रहते हैं । चेचक अपना प्रमाण जीवन भर के छोड़ देती हैं । 

चिकन पॉक्स/चेचक की चिकित्सा :-


  1. जिस दिन चेचक के दाने निकालें उस दिन रोगी को 5-7 मुनक्का के बीज निकल कर खिला देने चाहिए।
  2. दूध में जरा सा केशर मिला कर पिलाना चाहिए इससे चेचक का जहर खून से निकल कर फुंसियों में आ जाता हैं ।
  3. घर के बाहर या द्वार या खिड़कियों पर जहाँ से धूप आती हो उधर लाल रंग कर कपड़ा लटका देना चाहिए ।
  4. प्यास की अधिकता हो तो ज्वरोक्त ‘षडंग पानीय’ पीने को देना चाहिए ।
  5. निमोनिया, खांसी आदि उपद्रव के होने से कोई नुकसान नहीं होता हैं । लेकिन आँखों की सफाई और रक्षा का पूरा ध्यान देना चाहिए ।
  6. नीम के पत्तों को चारपाई पर बिछाना चाहिए तथा नीम की टहनी से मक्खी हटाना चाहिए । 

चिकन पॉक्स/चेचक से बचने के उपाय :-


  1. चिकन पॉक्स/चेचक से बचने का एक मात्र निश्चित उपाय हैं टिका लगवाना । बच्चे के जन्म के 12 महीने बाद ही टिका अवश्य लगवा देना चाहिए। बच्चे को टिका लगवाने के बाद चेचक बिलकुल नहीं होती हैं । टीके का प्रभाव तीन वर्ष तक होता हैं । अत: तीन वर्ष बाद पुन: टिका लगवाना चाहिए । 
  2. वसंत ऋतु के आरम्भ में प्राय: चेचक फैलती हैं इसलिए उस समय घर के सभी लोगों को टिका लगवाना चाहिए।
  3. घर में चिकन पॉक्स/चेचक होने पर सब लोगों को खूब सावधान रहना चाहिए । रोगी के छूने पर साबुन लगाकर हाथ धोना चाहिए ।
  4. रोगी के कमरे में किसी भी बच्चे को नहीं घुसने देना चाहिए ।
  5. घर में बड़े लोगों को भी बिना आवश्कयता के रोगी के पास न जाना चाहिए । रोगी के बिस्तरे और कपडे किसी की व्यवहार में न लाना चाहिए। 
  6. घरभर में दो बार धूप देना चाहिए। हर तरह सफाई का ध्यान रखने से रोग फैलने नहीं पाता ।
बिना सावधानी के घर  में यह रोग हो जाने से सब बच्चों में फैलते हुए देखा गया । रोगी बालक को चेचक के खुरण्ड भी नहीं नोंचने देने चाहिए ।

Monday, 19 February 2018

बच्चों के लिए आवश्यक टीके

जन्म के समय बच्चे कमजोर होते हैं। उनमे रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है। इसीलिए बच्चों का टीकाकरण जरुरी होता है। टीकाकरण से बच्चों के शरीर में antibodies बनते हैं जो बच्चे के शरीर को बिमारियो से लड़ने के लिए तैयार करते हैं। देखें - टीकाकरण चार्ट 2018।



हर माँ-बाप अपने बच्चे की अच्छी देखभाल मैं कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।  मगर अच्छी देखभाल करने के लिए जानकारी भी तो होना जरुरी है। इसीलिए माँ-बाप को बच्चों से सम्बंधित हर जानकारी से वाकिफ होना चाहिए। www.multicareclinic.blogspot.com में हमारी यही कोशिश रहती है की हम माँ-बाप को बच्चों से सम्बंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करा सकें जिससे की वे अपने बच्चों का अच्छा ख्याल रख सकें। जानकारी होने पे बच्चे की बीमारी में माँ-बाप सही देख-रेख करने में सक्षम होते हैं।

जब बच्चे का जन्म होता है तो बहुत से antibodies (बीमारियोँ से लड़ने की शक्ति) बच्चे को उसकी माँ से विरासत में मिलती है। यह एंटीबाडी बच्चे के शरीर में umbilical cord के द्वारा पहुँचती है। कुछ antibodies बच्चे को माँ से स्तनपान के जरिये मिलती रहती है। मगर यह antibodies बच्चे मैं बहुत देर तक infection से नहीं लड़ सकती है।

Infection से लड़ने के लिए बच्चे के शरीर को खुद सक्षम बनना होगा। विभिन प्रकार के टिके जो बच्चे को लगाए जाते हैं उन्ही के द्वारा बच्चे का शरीर अनेक प्रकार के बीमारियोँ से लड़ने में और उन बीमारियोँ  से बच्चे को बचने में माहिर बनता है। इन टीकों के मदद से बच्चे का शरीर जिंदगी भर बीमारियोँ से लड़ने में सक्षम बनता है। यूँ कहें की ये टिके ही बच्चे को सारी उम्र बीमारी से बचाते हैं।
टिके बच्चों के लिए जीवन रक्षक हैं मगर माँ-बाप को बच्चों के टिके के बारे मैं सही जानकारी होना अतिआवश्यक है। भारत (India) मैं पिछले कुछ दशक में कई प्रकार के जानलेवा बीमारियोँ का उन्मूलन किया जा चूका है। यह सिर्फ सरकार की दूरदर्शिता और लोगों के बीच जागरूकता के कारण हो सका है। इस लेख में आप जानेंगे कुछ बेहद जरुरी टिके (new born baby vaccination) के बारे में।

बीसीजी का टीका (B.C.G. vaccination)
यह टीका बच्चे को पैदा होते ही लगाया जाता है और यह टीका अंतर्त्वचीय इंजेक्शन के रूप में लगाया जाता है। बीसीजी का टीका बच्चे को टीबी से बचाता है।

डीपीटी का टीका (D.P.T. vaccination)
डीपीटी का टीका बच्चे को डिफ्थीरिया, परट्यूसिस और टिटनेस जैसे गंभीर जानलेवा बीमारियोँ से बचाता है। डिफ्थीरिया एक ऐसे बीमारी है जिसकी शुरुआत तो गले के खराश से होती है मगर समय के साथ ये आगे चलकर जीवन के कई जटिलताओं को बढ़ा देता है। परट्यूसिस को आम भाषा मैं काली खासी। यह फेपड़ों के infection से सम्बंधित बीमारी है। टिटनेस की वजह से घाव जल्दी नहीं भरते। डीपीटी का टीका इन सभी बीमारियोँ से बचाता है और इसे भी अंतर्त्वचीय इंजेक्शन की तरह लगाया जाता है। डीपीटी का टीका (D.P.T. vaccination) के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

खसरे का टीका
खसरे का टिके एक प्रकार के संक्रामक वायरल से बचाता है। इस बीमारी मैं शिशु को शरीर पे छोटे दाने निकल आते हैं और बुखार भी चढ़ जाता है। जब बच्चा 9 months का हो जाता है तब बच्चे को खसरे का टीका दिया जाता है।  खसरे का टीका के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

HIB का टीका - हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) वैक्सीन
मस्तिष्कावरण शोथ की वजह से शिशु के brain और spinal cord को नुकसान पहुँचता है। हिब का टीका बच्चे को मस्तिष्कावरण शोथ से बचाता है। इस टिके की dose बच्चे को चार श्रृंखला में दी जाती है। पहले दो टिके, पहले दो महीने मैं और दूसरे दो टिके 12 month पे दिए जाते हैं। HIB का टीका के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

ऊपर दी गयी सारी बीमारी बहुत खतरनाक है। अगर बच्चों को ये महत्वपूर्ण टीके समय पे लगाए गए तो बच्चों को इन जानलेवा बीमारियोँ से बचाया जा सकता है और बच्चों को जिंदगी भर इन बीमारियोँ से दूर रखा जा सकता है। बच्चो को समय पे टीके लगवाने के लिए अपने बच्चे के डॉक्टर से संपर्क करें और उससे टीके के schedule को प्राप्त करें।

टीकाकरण कार्यक्रम - राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत लगने वाले टीके
जब माता पिता टीकाकरण का महत्व जानते हैं और टीकाकरण अभियान का लाभ उठा कर आपने बच्चों को टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण चार्ट २०१७ (Vaccination chart and scheduler for Indian babies) के अनुसार आपने बच्चों को टीका लगवाते हैं तो बच्चे तंदरुस्त होते हैं और नानां प्रकार के बीमारियों से बचे रहते हैं।
बच्चे के जन्म के समय दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at Birth)
B.C.G.
हेपेटाइटिस बी का टीका- पहली खुराक
पोलियो वैक्सीन - पहली खुराक
6 सप्ताह और डेढ़ माह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 6 weeks)
D.P.T. - पहली खुराक
पोलियो का टिका- पहली खुराक (IPV1)
हेपेटाइटिस बी का टीका - दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - पहली खुराक
रोटावायरस- पहली खुराक
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- पहली खुराक
10 सप्ताह और ढाई माह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 10 week)
D.P.T. - दूसरी खुराक
पोलियो का टिका- दूसरी खुराक (IPV2)
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - दूसरी खुराक
रोटावायरस- दूसरी खुराक
14 सप्ताह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 14 weeks)
D.P.T. - तीसरी खुराक
पोलियो का टिका- तीसरी खुराक (IPV3)
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - तीसरी खुराक
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- तीसरी खुराक
रोटावायरस- तीसरी खुराक
6 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 6 month)
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन - तीसरी खुराक OPV
हेपेटाइटिस बी का टीका - तीसरी खुराक
इन्फ्लुएंजा I
इन्फ्लुएंजा II
इन्फ्लुएंजा III
9 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 9 month)
खसरे का टीका
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन - चौथी खुराक
10-12 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 10 to 12 month)
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1) - पहली खुराक
हेपेटाइटिस A - पहली खुराक
थोड़े समय बाद हेपेटाइटिस A - दूसरी खुराक
1 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given once child completes 1 year)
कॉलरा
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - पहली खुराक
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - दूसरी खुराक
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - तीसरी खुराक
वेरिसेला- पहली खुराक
15-18 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 15 to 18 months)
15-18 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 15 to 18 months)
एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) - पहली खुराक
वेरिसेला- दूसरी खुराक
D.P.T.- पहला बूस्टर डोज़
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - बूस्टर डोज़
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- बूस्टर डोज़
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- पांचवा खुराक
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 2) - दूसरी खुराक
टाइफाइड I
टाइफाइड II
2 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the completion of 2 years)
मेनिंगोकोकल
5 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the age of 5)
एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) - दूसरी खुराक
D.P.T.- दूसरा बूस्टर डोज़
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- छठा खुराक
10 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the age of 10 years)
टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया)
★बंटी चन्द्रसेन(ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक)
★ उप स्वास्थ्य केंद्र पथर्रा जिला कबीरधाम छ.ग.