Monday, 19 February 2018

बच्चों के लिए आवश्यक टीके

जन्म के समय बच्चे कमजोर होते हैं। उनमे रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है। इसीलिए बच्चों का टीकाकरण जरुरी होता है। टीकाकरण से बच्चों के शरीर में antibodies बनते हैं जो बच्चे के शरीर को बिमारियो से लड़ने के लिए तैयार करते हैं। देखें - टीकाकरण चार्ट 2018।



हर माँ-बाप अपने बच्चे की अच्छी देखभाल मैं कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।  मगर अच्छी देखभाल करने के लिए जानकारी भी तो होना जरुरी है। इसीलिए माँ-बाप को बच्चों से सम्बंधित हर जानकारी से वाकिफ होना चाहिए। www.multicareclinic.blogspot.com में हमारी यही कोशिश रहती है की हम माँ-बाप को बच्चों से सम्बंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करा सकें जिससे की वे अपने बच्चों का अच्छा ख्याल रख सकें। जानकारी होने पे बच्चे की बीमारी में माँ-बाप सही देख-रेख करने में सक्षम होते हैं।

जब बच्चे का जन्म होता है तो बहुत से antibodies (बीमारियोँ से लड़ने की शक्ति) बच्चे को उसकी माँ से विरासत में मिलती है। यह एंटीबाडी बच्चे के शरीर में umbilical cord के द्वारा पहुँचती है। कुछ antibodies बच्चे को माँ से स्तनपान के जरिये मिलती रहती है। मगर यह antibodies बच्चे मैं बहुत देर तक infection से नहीं लड़ सकती है।

Infection से लड़ने के लिए बच्चे के शरीर को खुद सक्षम बनना होगा। विभिन प्रकार के टिके जो बच्चे को लगाए जाते हैं उन्ही के द्वारा बच्चे का शरीर अनेक प्रकार के बीमारियोँ से लड़ने में और उन बीमारियोँ  से बच्चे को बचने में माहिर बनता है। इन टीकों के मदद से बच्चे का शरीर जिंदगी भर बीमारियोँ से लड़ने में सक्षम बनता है। यूँ कहें की ये टिके ही बच्चे को सारी उम्र बीमारी से बचाते हैं।
टिके बच्चों के लिए जीवन रक्षक हैं मगर माँ-बाप को बच्चों के टिके के बारे मैं सही जानकारी होना अतिआवश्यक है। भारत (India) मैं पिछले कुछ दशक में कई प्रकार के जानलेवा बीमारियोँ का उन्मूलन किया जा चूका है। यह सिर्फ सरकार की दूरदर्शिता और लोगों के बीच जागरूकता के कारण हो सका है। इस लेख में आप जानेंगे कुछ बेहद जरुरी टिके (new born baby vaccination) के बारे में।

बीसीजी का टीका (B.C.G. vaccination)
यह टीका बच्चे को पैदा होते ही लगाया जाता है और यह टीका अंतर्त्वचीय इंजेक्शन के रूप में लगाया जाता है। बीसीजी का टीका बच्चे को टीबी से बचाता है।

डीपीटी का टीका (D.P.T. vaccination)
डीपीटी का टीका बच्चे को डिफ्थीरिया, परट्यूसिस और टिटनेस जैसे गंभीर जानलेवा बीमारियोँ से बचाता है। डिफ्थीरिया एक ऐसे बीमारी है जिसकी शुरुआत तो गले के खराश से होती है मगर समय के साथ ये आगे चलकर जीवन के कई जटिलताओं को बढ़ा देता है। परट्यूसिस को आम भाषा मैं काली खासी। यह फेपड़ों के infection से सम्बंधित बीमारी है। टिटनेस की वजह से घाव जल्दी नहीं भरते। डीपीटी का टीका इन सभी बीमारियोँ से बचाता है और इसे भी अंतर्त्वचीय इंजेक्शन की तरह लगाया जाता है। डीपीटी का टीका (D.P.T. vaccination) के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

खसरे का टीका
खसरे का टिके एक प्रकार के संक्रामक वायरल से बचाता है। इस बीमारी मैं शिशु को शरीर पे छोटे दाने निकल आते हैं और बुखार भी चढ़ जाता है। जब बच्चा 9 months का हो जाता है तब बच्चे को खसरे का टीका दिया जाता है।  खसरे का टीका के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

HIB का टीका - हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) वैक्सीन
मस्तिष्कावरण शोथ की वजह से शिशु के brain और spinal cord को नुकसान पहुँचता है। हिब का टीका बच्चे को मस्तिष्कावरण शोथ से बचाता है। इस टिके की dose बच्चे को चार श्रृंखला में दी जाती है। पहले दो टिके, पहले दो महीने मैं और दूसरे दो टिके 12 month पे दिए जाते हैं। HIB का टीका के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त करें।

ऊपर दी गयी सारी बीमारी बहुत खतरनाक है। अगर बच्चों को ये महत्वपूर्ण टीके समय पे लगाए गए तो बच्चों को इन जानलेवा बीमारियोँ से बचाया जा सकता है और बच्चों को जिंदगी भर इन बीमारियोँ से दूर रखा जा सकता है। बच्चो को समय पे टीके लगवाने के लिए अपने बच्चे के डॉक्टर से संपर्क करें और उससे टीके के schedule को प्राप्त करें।

टीकाकरण कार्यक्रम - राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत लगने वाले टीके
जब माता पिता टीकाकरण का महत्व जानते हैं और टीकाकरण अभियान का लाभ उठा कर आपने बच्चों को टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण चार्ट २०१७ (Vaccination chart and scheduler for Indian babies) के अनुसार आपने बच्चों को टीका लगवाते हैं तो बच्चे तंदरुस्त होते हैं और नानां प्रकार के बीमारियों से बचे रहते हैं।
बच्चे के जन्म के समय दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at Birth)
B.C.G.
हेपेटाइटिस बी का टीका- पहली खुराक
पोलियो वैक्सीन - पहली खुराक
6 सप्ताह और डेढ़ माह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 6 weeks)
D.P.T. - पहली खुराक
पोलियो का टिका- पहली खुराक (IPV1)
हेपेटाइटिस बी का टीका - दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - पहली खुराक
रोटावायरस- पहली खुराक
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- पहली खुराक
10 सप्ताह और ढाई माह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 10 week)
D.P.T. - दूसरी खुराक
पोलियो का टिका- दूसरी खुराक (IPV2)
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - दूसरी खुराक
रोटावायरस- दूसरी खुराक
14 सप्ताह की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 14 weeks)
D.P.T. - तीसरी खुराक
पोलियो का टिका- तीसरी खुराक (IPV3)
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- दूसरी खुराक
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - तीसरी खुराक
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- तीसरी खुराक
रोटावायरस- तीसरी खुराक
6 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 6 month)
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन - तीसरी खुराक OPV
हेपेटाइटिस बी का टीका - तीसरी खुराक
इन्फ्लुएंजा I
इन्फ्लुएंजा II
इन्फ्लुएंजा III
9 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 9 month)
खसरे का टीका
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन - चौथी खुराक
10-12 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 10 to 12 month)
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1) - पहली खुराक
हेपेटाइटिस A - पहली खुराक
थोड़े समय बाद हेपेटाइटिस A - दूसरी खुराक
1 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given once child completes 1 year)
कॉलरा
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - पहली खुराक
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - दूसरी खुराक
जापानीज इन्सेफेलाइटिस - तीसरी खुराक
वेरिसेला- पहली खुराक
15-18 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 15 to 18 months)
15-18 महीने की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at 15 to 18 months)
एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) - पहली खुराक
वेरिसेला- दूसरी खुराक
D.P.T.- पहला बूस्टर डोज़
हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) - बूस्टर डोज़
न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन- बूस्टर डोज़
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- पांचवा खुराक
टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 2) - दूसरी खुराक
टाइफाइड I
टाइफाइड II
2 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the completion of 2 years)
मेनिंगोकोकल
5 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the age of 5)
एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) - दूसरी खुराक
D.P.T.- दूसरा बूस्टर डोज़
मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन- छठा खुराक
10 वर्ष की उम्र में दिए जाने वाला टीका (List of vaccines to be given at the age of 10 years)
टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया)
★बंटी चन्द्रसेन(ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक)
★ उप स्वास्थ्य केंद्र पथर्रा जिला कबीरधाम छ.ग.

Wednesday, 15 November 2017

पुरुष नसबंदी (NSVT) के फायदे

जानिये पुरुष नसबंदी क्या होती है और पुरुष नसबंदी के तरीकों के बारे में, क्या पुरुष नसबंदी के नुकसान भी है और पुरुष नसबंदी कितनी कारगर है. What is Male Vasectomy and how it is performed. How effective Male Vasectomy is in contraception?पुरुष नसबंदी 
Contents
  • 1 पुरुष नसबंदी क्या है?
  • 2 क्या पुरुष नसबंदी तुरंत प्रभावी हो जाता है?
  • 3 पुरुष और महिला नसबंदी के बीच अंतर क्या है?
  • 4 पुरुष नसबंदी कितना लोकप्रिय है?
  • 5 पुरुष नसबंदी के क्या जोखिम या जटिलताएं हैं?
  • 6 पुरुष नसबंदी लम्बे समय तक रह सकने वाले साइड इफेक्ट्स
  • 7 क्या मैं नसबंदी करा लूं?
नसबंदी, गर्भनिरोधन का स्थायी तरीका है। यह महिला और पुरुष दोनों के लिए उपलब्ध है। महिला नसबंदी में दोनों फालोपियन ट्यूब को काट दिया जाता है। पुरुष नसबंदी में भी नसों या ट्यूब को ही काटा जाता है जो की स्पर्म्स को वीर्य में मिलाती है। सफल नसबंदी के बाद बच्चा नहीं ठहरता। पुरुष नसबंदी के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं होना होता। पुरुष उसी दिन घर जा सकता है। इसे करने में करीब 20 मिनट का समय लगता है।
यह स्थायी बंध्याकरण या बाँझ करने का तरीका है। इसलिए सभी तरह से सोच समझ कर, इसके साइड-इफेक्ट्स, लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स, रिस्क और जटिलताओं को जानने के बाद ही नसबंदी का फैसला किया जाना चाहिए, इसके बारे में अपने पार्टनर से भी बात करनी चाहिए। जब आप पूरी तरह से आश्वस्त हों तभी इसे कराने का निर्णय लें। इसे कराने का मकसद बिना टेंशन सेक्स करना है लेकिन बहुत से पुरुष इसे करवा लेने के बाद डिप्रेस हो जाते हैं, प्रजनन अंग के बारे में सोचने लगते हैं, तनाव में आ जाते हैं, दर्द महसूस करते हैं और अपने को बाँझ सोचने के कारण सेक्स के प्रति कम रूचि | लो लिबिडो, का शिकार हो जाते हैं। इसलिए इसे कराने या न कराने के लाभ-हानि को ध्यान में रखें। किसी के कहने से ही इसे न करा लें।

पुरुष नसबंदी क्या है?

What is a vasectomy?
पुरुष नसबंदी पुरुषों के लिए स्थायी बंध्याकरण का एक रूप है। इस तरीके के द्वारा वास डेफरेंस ट्यूबों को काट कर सील कर दिया जाता है।
यह पुरुषों के लिए स्थाई गर्भ\निरोधन का सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
वास डेफरेंस Vas Deferens या डक्टस डेफरेन्स ductus deferens पुरुष प्रजनन अंगों में पायी जाने वाली यह दो ट्यूब्स हैं जो की स्पर्म्स | शुक्राणु का ट्रांसपोर्ट करती हैं। यह एपीडाइडिमिस से स्पर्म्स को एजाकुलेटरी डक्ट तक ले जाती है। यह करीब 30 सेंटीमीटर लम्बी और 3-5 मिलीमीटर व्यास की होती है। एजाकुलेशन या वीर्य के निकलते समय, वासडिफरेंस सुकड़ती हैं और शुक्राणुओं को आगे की ओर धकेलती हैं।
पुरुषों में वास डेफरेंस को काट कर परमानेंट बंध्याकरण कर देते हैं। इसके क्त जाने पर सीमन तो बनता रहता हैं लेकिन उसमें शुक्राणु नहीं होते जिससे गर्भाधान नहीं होता। यह कंट्रासेप्शन का स्थायो तरीका है।
पुरुष नसबंदी के लिए जनरल एनेस्थीसिया नहीं दिया जाता बल्कि केवल लोकल एनेस्थीसिया प्रयोग में लाया जाता है।

क्या पुरुष नसबंदी तुरंत प्रभावी हो जाता है?

Do vasectomies work immediately?
नहीं। यह तरीका प्रभावी होने में कई महीनों लग सकते हैं क्योंकि ट्यूब्स में स्पर्म्स रह सकते हैं जो वीर्य के साथ निकलते हैं। इस समय के दौरान, कोई और प्रोटेक्शन की जानी चाहिए नहीं तो महिला गर्भवती हो सकती है। कम से कम तीन महीने के बाद यह तरीका प्रभाव हो सकता है। तीन महीने के बाद स्पर्म काउंट के लिए किये जाने वाले टेस्ट से पता किया जा सकता हैं की स्पर्म, सिमन में है की नहीं।
क्या पुरुष नसबंदी का यह तरीका दर्द करता है?
नहीं, दर्द तो नहीं करता लेकिन ज्यादतर पुरुषों को यह असहज लगता है। एनेस्थीसिया देते समय इंजेक्शन लगाने के दौरान, इंजेक्शन वाला दर्द होता है।
पुरुष नसबंदी के कितनी देर बाद मैं काम कर सकता हूँ?
How long does recovery after a vasectomy take?
ज्यादातर पुरुष 2-3 दिन बाद काम पर जा सकते हैं। नार्मल फिजिकल एक्टिविटीज जैसे की भागना, वर्क आउट, भारी समान उठाना आदि सात दिन बाद शुरू किये जा सकते हैं।
क्या नसबंदी मेरी सेक्स लाइफ को प्रभावित करेगी?
Will a vasectomy affect my sex life?
नसबंदी के बाद कुछ महीनों तक टेस्टिकल में आपको हल्का दर्द हो सकता है। लेकिन सेक्स में रुचि, इरेक्शन क्षमता, या स्खलन पर कोई प्रभाव नहीं होता।

पुरुष और महिला नसबंदी के बीच अंतर क्या है?

किसी महिला में नसबंदी करने के लिए फालोपियन ट्यूब्स को काट दिया जाता है। इसे करने के लिए  जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है।
पुरुष नसबंदी में वासडिफरेंस ट्यूब्स को काट कर सील कर दिया जाता है। यह कोई बहुत लम्बा ऑपरेशन नहीं होता और लोकल एनेस्थीसिया दे कर लिया जाता है। इसे आउट पेशेंट सर्जरी के दौरान किया जाता है।
महिला नसबंदी की तुलना में, पुरुष नसबंदी सरल और अधिक प्रभावी है, इसमें कम जटिलताएं हैं और बहुत कम खर्चीली हैं।

पुरुष नसबंदी कितना लोकप्रिय है?

How popular is vasectomy?
  1. अलग-अलग देशों में इसकी लोकप्रियता अलग-अलग है।
  2. भारत में इसे कराने वाले पुरुषों का प्रतिशत केवल 7 से 8 है। ऐसा ही चीन में भी है।
  3. न्यूज़ीलैण्ड में इसे कराने वालों का प्रतिशत 23 है।
  4. अमेरिका और यूरोप में 11 प्रतिशत आदमियों ने इसे कराया है।
  5. यूनाइटेड किंगडम में करीब 18 प्रतिशत ने वेस्क्टोमी करा रखी है।
  6. 40-50 आयु के पुरुषों में यह ज्यादा लोकप्रिय है जिनके परिवार पूरे हैं और उन्हें और बच्चे नहीं चाहिए।
  7. 40 वर्ष से कम आयु के लोग इसे बहुत कम कराते हैं क्योंकि एक बार इसे करा लेने पर बच्चा नहीं हो सकता।
क्या पुरुष नसबंदी या कंडोम के अलावा कोई वैकल्पिक पुरुष गर्भनिरोधक है?
Are there alternative male contraceptives other than vasectomy or condoms?
कुछ वर्षों से मेल गर्भ निरोधकों पर अनुसंधान चल रहा है। अभी तक ऐसा उपलब्ध नहीं है।
क्या एक पुरुष नसबंदी मुझे यौन रोग, एचआईवी या अन्य यौन संचारित बीमारियों से बचाएगा?
Will a vasectomy protect me against venereal disease, HIV or other sexually transmitted diseases?
नहीं। इन रोगों के विरुद्ध अपने और साथी की सुरक्षा के लिए आपको कंडोम का उपयोग करने की आवश्यकता है।
पुरुष नसबंदी कितना प्रभावी है?
How effective is a vasectomy?
कोई भी गर्भनिरोधक तरीका 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है।
यह 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावी है: पुरुष नसबंदी के पहले वर्ष में, प्रत्येक 1,000 में से केवल एक या दो महिलाओं ही गर्भवती हुईं।
For more detail:- www.multicareclinic.blogspot.com

                                          पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 
छत्तीसगढ में परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 21.11.2017 से 04.12.2017 तक आयोजित किया जा रहा है। यह पखवाड़ा 2 चरणों में सम्पादित होगा-
1. Mobillization Phase - 21.11.2017 से 27.11.2017 तक
2. Service Delivery Phase - 28.11.2017 से 04.12.2017 तक
                                       राज्य शासन  द्वारा पात्र हितग्राही को 3000₹ अंशदान दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के मितानिन या ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजको से सम्पर्क करे।।