Sunday, 2 July 2017

मानसून में सेहत का ऐसे रखे ख्याल

बारिश का मौसम आ चुका है और इस समय सबसे अधिक खतरा रहता है इंफेक्शन का शरीर पर लगना। वर्षा के मौसम में शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता घट जाती है। एैसे में टाइफाइड,सर्दी.जुकाम, दस्त, पीलिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। और मासून की ये बीमारियां छोटे बच्चों से लेकर बड़े बजुर्गों को भी परेशान करती हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आपको अपने खान-पान पर ध्यान देना। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे करें अपनी सेहत की सुरक्षा इस मौसम में।
मानसून में स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय-
खाने में
मानसून के मौसम में गर्मी और उमस बहुत होती है। जिससे शरीर में विटामिनों की कमी होती है। एैसे में जरूरी है कि आप अपने भोजन में संतरे व नारंगी का जूस ए बादामए दूध से बनी चीजें और हरि सब्जियों का सेवन अधिक करें। यदि आप खाने में इन बताई गई चीजों का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर की इम्युनिटी सिस्टम ताकतवर होगा। जिससे शरीर में बीमारियां लगने की संभावना नहीं होती है। जो लोग मांस का सेवन करते हैं वे मानसून के मौसम में रेड मीट आदि का सेवन करें।
बासी खाना हो सकता है खतरनाक
मानसून में यदि आप इफेक्शन से बचना चाहते हो तो बासी खाने का सेवन ना करें। बासी खाना पेट मे जाकर फंगस आदि बनाता है जब आप बासी खाना खाते हैं वह सीधे आपके पाचनतंत्र को प्रभावित करता है जिससे उल्टीए दस्त और सिर दर्द हो सकता है। इसलिए आप बासी खाना ना खाएं और सलाद और ताजे खाने को खाएं। इसके अलावाआप जो भी सब्जी व फल खाते हैं उन्हें अच्छी तरह से साफ करें। क्योंकि यह टाइफाॅइड को न्योता देता है।
पानी के साथ कोई समझौता नहीं
मानसून के मौसम में अक्सर प्यास कम लगती है। जिससे शरीर धीरे.धीरे कमजोर होने लगता है। इसलिए आप साफ पानी पीएं। जो लोग गांव में रहते हैं वे पानी को उबालकर उसे ठंडा कर के पीएं। पानी शरीर को पोषण देता है। ध्यान रखें आप जो पानी बाहर पीते हैं वे आपके लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए फिल्टर का पानी ही पीएं। पीलिया और टाइफाॅड की अधिक समस्याएं गंदे पानी के सेवन करने से होती हैं। इसलिए ध्यान रखें।
हल्का फुल्का खाना लें
सुबहए शाम और रात के खाने के बीच-बीच में हल्का-फुल्का कुछ ना कुछ खाते रहें। एैसा करने से शरीर अंदर से मजबूत बनेगा।
मानसून के मौसम का खूब मजे लें और बारिश आदि में नहाएं बस इन बातों को अपने ध्यान में जरूर रखें। सेहत का ध्यान रखने के लिए आपको जरूरी है कि कैसे अपने आपको बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसलिए आप चिंता ना करें मैं आपको समय-समय पर आपकी अच्छी सेहत के लिए जानकारी देता रहूँगा।
@Bunty chandrasen kawardha

Saturday, 17 June 2017

क्षय रोग (टीबी) के लक्षण, प्रकार और इसे रोकने के उपाय

टीबी रोग एक संक्रामक बीमारी है इसे तपेदिक, क्षयरोग के नाम से भी जाना जाता है| हमारे देश में लाखो लोग इस बीमारी से ग्रसित है| यह बीमारी Mycobacterium Tuberculosis नामक जीवाणु कि वजह से होती है। यह जीवाणु ज्यादातर हमारे फेफड़ो पर असर करते है| जब सांस के द्वारा यह जीवाणु आपके शरीर में जाता है तो तब टीबी होने का खतरा होता है|
टी बी बीमारी  को छूत की बीमारी कहा जाता है| रोगी के निरंतर संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को भी यह रोग होने की बहुत ज्यादा संभावना होती है| यह बीमारी ज्यादातर कमजोर लोगो को अपने चपेट में लेती है| अगर किसी का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर है तो व्यक्ति के इस बीमारी के चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है|
टीबी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भाग जैसे त्वचा, लिम्फ ग्रंथियां, हड्डियों के जोड़ आदि को भी प्रभावित कर सकता है| यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है| जब भी टीबी संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति खांसी, छींक, या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं| तो उनमे उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सांस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं।
क्षय रोग के लक्षणों की बात की जाये तो| इसके मरीजों में लगातार खांसी बनी रहती है| कई बार तो खांसी में खून भी आने लगता है| आइये जानते है इसके और भी कई लक्षणों के बारे में|

Symptoms of Tb: इन् लक्षणों से करे तपेदिक की पहचान


Tb Symptoms in Hindi

तपेदिक से पीड़ित लोगो में निचे दिए गए कुछ या फिर सारे लक्षण देखे जा सकते है| कई बार तो इसके जीवाणु शरीर में होने के बावजूद भी कोई लक्षण नहीं दिखाई देते| दरहसल यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो तो यह जीवाणु निष्क्रिय रहते है और इस कारण उन्हें कोई बीमारी नहीं होती लेकिन जब किसी कारणवश ऐसे लोगो में प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो जाती है, तब यह निष्क्रिय जीवाणु सक्रीय होकर क्षय रोग का फैलाव करते है।

  1. चाहे ठंडी हो या गर्मी, इसके रोगियों को रात के वक्त अधिक पसीना आता है|
  2. अगर 3 हफ्ते से अधिक समय तक खांसी बनीं हुई है और अभी भी ठीक नहीं हुई हो तो बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क करे|
  3. खांसी या बलगम में खून आना, एक महीने से ज्यादा समय तक सीने में दर्द बना रहना इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है|
  4. अगर बिना किसी कारण के लगातार आपका वजन कम होते जा रहा है तो यह भी क्षय रोग का शुरुवाती लक्षण हो सकता है|
  5. एक महीने से ज्यादा समय बुखार रहना , भूख ना लगना, पीठ में दर्द और पैरो में कमजोरी महसूस होना भी इस बीमारी के लक्षण है|
  6. टी बी के शुरआती वक्त में थोड़ा सा ही काम करने पर थकावट महसूस होती है| कई बार इस बात पर हम ध्यान नहीं देते| लगातार थकान बने रहने पर अपने डॉक्टर को जरूर दिखाए|

टीबी के प्रकार

क्षय रोग तीन प्रकार के होतें है| तीनो में ही रोगी की अवस्था अलग होती है| हम आपको तीनो के लक्षण बता रहे है, जिससे की आप इसे पहचान सके और तुरंत इसका उपचार कर सके|
पेट का तपेदिक: पेट के टीबी का जल्दी पता नहीं चल पाता| इसमें रोगियों को पेट में दर्द और बार बार दस्त होते है| इसके अलावा कई बार पेट के अन्दर गाँठ भी बन जाती है| लेकिन हम इसे आम समस्या सोचकर नजर अंदाज कर देते है| इसलिए अगर आपको पेट से जुडी कोई समस्या लगातार दिख रही है, तो बिना देर लगाये तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें|
फेफड़े का तपेदिक: फेफड़े के टीबी का पता भी आसानी से नहीं चलता| यह रोग धीरे धीरे शरीर के अंदर ही बढता चला जाता है, और जब बहुत देर हो जाती है तब हमें इसका पता चलता है| यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति हो सकता है| अलग अलग उम्र में इसके अलग अलग लक्षण दिखाई पड़ते है| इन् सब में धडकनों का तेज़ हो जाना, सर में दर्द रहना और कफ बनना आम बात है|
हड्डियों का तपेदिक: ऊपर दिए गए टीबी के प्रकारों की तुलना में से इस वाले टीबी को पहचानना थोड़ा आसान होता है| इसके मरीजों में हड्डियों में दर्द की शिकायत देखने को मिलती है| हड्डियों में कमजोरी और मासपेशियों में दर्द और खिचाव इसके आम लक्षण है| साथ ही शरीर में घाव और फोड़े भी देखने को मिल सकते है|

क्षय रोग संक्रमण को फैलने से रोकने के उपाय

  1. टी बी रोग से पीड़ित व्यक्ति को यहाँ वहा नहीं थूकना चाहिए|
  2. इसके मरीजों को अपने हात हमेशा खाने से पहले और खाने के बाद जरूर धोना चाहिए|
  3. क्षय रोग के कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करके जाँच करवानें चाहिए|
  4. इसके रोगी को खासते या चीखते वक्त मुह पर हाथ या रुमाल रखना चाहिए| इस तरह इस संक्रमण से अन्य लोग प्रभावित नहीं होते है|
  5. क्षय रोग से पीड़ित रोगी को अपनी दवा ठीक समय पर और पूरी अवधि तक लेनी चाहिए। वक्त से पहले दवा छोड़ देने से वापिस इस रोग के होने की सम्भावना बन जाती है|